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अनुच्छेद 22 के साथ भारत का संविधान लागू हुआ, गिरफ्तारी पर सुरक्षा

26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और अनुच्छेद 22 ने गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी किया।

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यह सार AI ने संदर्भ पूरा करने के लिए लिखा है; यह किसी ताज़ा स्रोत पर आधारित नहीं है।

भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जिस दिन भारत गणराज्य बना। इसे संविधान सभा (संविधान बनाने वाली संस्था) ने 26 नवंबर 1949 को अपनाया था। यह तारीख 1930 की स्वतंत्रता की घोषणा की याद में चुनी गई थी।

मौलिक अधिकारों के तहत अनुच्छेद 22 ने गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों को सुरक्षा दी। व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण यथाशीघ्र बताए जाने चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने और बचाव कराने का अधिकार है।

अनुच्छेद 22(2) ने समय-सीमा जोड़ी: गिरफ्तार व्यक्ति को निकटतम मजिस्ट्रेट (निचली अदालत के न्यायाधीश) के सामने 24 घंटे के भीतर पेश करना होगा। इसमें गिरफ्तारी की जगह से अदालत तक यात्रा का समय नहीं गिना जाता। मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना किसी को इससे अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

इस नियम का उद्देश्य पुलिस द्वारा मनमानी या गुप्त हिरासत रोकना और शुरुआती हिरासत को न्यायिक निगरानी में रखना था। अनुच्छेद 22 निवारक हिरासत की भी अनुमति देता है, जिसके लिए अलग सुरक्षा उपाय हैं। अदालतों ने बाद में कई मामलों में 24 घंटे की शर्त की व्याख्या की है, जिसमें यह भी शामिल है कि घड़ी कब शुरू होती है।

कहानी की टाइमलाइन

24 घंटे की हिरासत सीमा पर सुप्रीम कोर्ट · 3 घटनाएँ

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  1. अनुच्छेद 22 के साथ भारत का संविधान लागू हुआ, गिरफ्तारी पर सुरक्षा

इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।

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