बोखुम में श्रम समझौते की 65वीं वर्षगांठ कविताओं और लोकगीतों से मनाई गई
बोखुम में 1961 के श्रम समझौते की 65वीं वर्षगांठ एक ऐसी शाम से मनाई गई, जिसमें लेखकों की कहानियां, कवियों की कविताएं और तुर्की लोकगीत थे।

तुर्की और जर्मनी के बीच 30 अक्टूबर 1961 को हुए श्रम भर्ती समझौते (Anwerbeabkommen) की 65वीं वर्षगांठ बोखुम में साहित्य और संगीत के साथ मनाई गई। इस आयोजन में नॉर्थ राइन-वेस्टफालिया राज्य के परिवार और समावेश मंत्रालय, बोखुम नगर परिषद और कई संगठनों ने सहयोग दिया। शाम का संचालन बेतुल बोज़दाग और इब्राहिम एसेर ने किया।
"प्रवास और साहित्य" विषय वाली इस शाम में ATYG (यूरोप में बसे तुर्क मूल के लेखकों का समूह), फ़िकिर अतोल्येसी वर्कशॉप और GEMI e.V. के लेखकों ने कहानियां और कवियों ने कविताएं पढ़ीं। ATYG के सेवानिवृत्त शिक्षक केमाल यालचिन ने बताया कि समूह की स्थापना 40 साल पहले फ़कीर बायकुर्त ने की थी और अब इसमें 30 लेखक, कवि और कलाकार हैं। यालचिन ने कहा: "प्रवास ने हम सबको बदल दिया। जर्मनी ने हमें बदला, और हमने जर्मनी को बदला।"
शाम का समापन संगीत से हुआ 🎶। इस्मेत क़िलिच के निर्देशन में Yola Türküler Rhein Peri Melodileri कोरस ने तुर्की लोकगीत गाकर पूरे हॉल में जोश भर दिया।
कहानी की टाइमलाइन
Türk-Alman İş Gücü Anlaşması yıldönümü · 4 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।
