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तुर्की संसदीय समिति ने मक्का रक्षा समझौते के विधेयक को मंज़ूरी दी

27 अक्टूबर 2026 को विदेश मामलों की समिति ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मक्का समझौते की पुष्टि वाले विधेयक का समर्थन किया और उसे पूरी संसद को भेजा।

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यह सार AI ने संदर्भ पूरा करने के लिए लिखा है; यह किसी ताज़ा स्रोत पर आधारित नहीं है।

27 अक्टूबर 2026 को तुर्किये की ग्रैंड नेशनल असेंबली (TBMM, यानी तुर्की की संसद) की विदेश मामलों की समिति ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की पुष्टि करने वाले विधेयक को मंज़ूरी दे दी। यह समझौता तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान को आपस में जोड़ता है।

तीनों देशों ने 16 अनुच्छेदों वाले इस समझौते पर 7 अगस्त को मक्का में हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा। समझौते में सैन्य सहयोग, हथियारों का साझा उत्पादन, तकनीक का हस्तांतरण और खुफ़िया जानकारी साझा करने का भी प्रावधान है।

विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों के बावजूद विधेयक राष्ट्रपति एर्दोआन की सत्तारूढ़ पार्टी और उसके सहयोगियों के वोटों से समिति में पास हो गया। उप विदेश मंत्री लेवेंट ग्युमरुक्चु ने समझौते को रक्षात्मक बताया। उनके मुताबिक़ यह किसी देश के ख़िलाफ़ नहीं है और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करने वाले अन्य क्षेत्रीय देशों के लिए खुला है। समिति के अध्यक्ष फ़ुआत ओक्ताय ने उन आशंकाओं को ख़ारिज किया कि यह नाटो का विकल्प बन सकता है।

समिति का मतदान अनुमोदन प्रक्रिया का एक चरण था। विधेयक को अंतिम मतदान के लिए अभी जनरल असेंबली, यानी पूरे सदन, में जाना था। इस समझौते के तहत तुर्की के सैनिकों को विदेश भेजने के लिए संसद की अलग से अनुमति ज़रूरी होगी।

कहानी की टाइमलाइन

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की मंज़ूरी · 3 घटनाएँ

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  1. तुर्की संसदीय समिति ने मक्का रक्षा समझौते के विधेयक को मंज़ूरी दी

इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।

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