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यूरोप की उड़ानों पर फिर फ़र्ज़ी बम धमकियाँ: क्या यह हाइब्रिड वॉर है?

गुरुवार को फ़र्ज़ी बम धमकियों के कारण यूरोप में कम से कम 25 उड़ानों को रास्ता बदलना पड़ा या एस्कॉर्ट में उड़ना पड़ा। विशेषज्ञ पूछ रहे हैं कि क्या यह हाइब्रिड वॉर है।

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A passenger jet parked on an airport apron under heavy security presence as police vehicles stand nearby.
तस्वीर: dw.com

एक भी बम नहीं मिला। फिर भी गुरुवार को फ़र्ज़ी धमकियों ने पूरे यूरोप में दर्जनों उड़ानों को बाधित कर दिया, और एक ही हफ़्ते में यह दूसरी बार हुआ।

क्या हुआ?

धमकियाँ आयरलैंड से बुल्गारिया तक की एयरलाइनों को निशाना बना रही थीं। कम से कम 25 उड़ानों को डायवर्ट किया गया या एस्कॉर्ट दिया गया, जिनमें रोम, मिलान, पेरिस, प्राग और सोफ़िया जा रही उड़ानें भी थीं।

बुल्गारिया में सैन्य जेट विमानों ने तीन यात्री विमानों को एस्कॉर्ट किया। लंदन से आ रही एक उड़ान को सोफ़िया की जगह प्लोवदीव भेजा गया। स्पेन में अधिकारियों को 20 मिनट से भी कम समय में तीन ईमेल धमकियाँ मिलीं, जो मैड्रिड और पेरिस, रोम व मिलान के बीच की छह उड़ानों के लिए थीं।

चेक गणराज्य, इटली, ऑस्ट्रिया, पोलैंड और रोमानिया की उड़ानें भी प्रभावित हुईं। कोपेनहेगन में सेना की बम निरोधक इकाई ने दो विमानों की तलाशी ली और कुछ नहीं मिला। लगभग हर उड़ान सुरक्षित लैंडिंग के साथ ख़त्म हुई।

हाइब्रिड वॉर की बात क्यों हो रही है?

"हाइब्रिड वॉर" का मतलब है खुली लड़ाई के बिना दबाव बनाना, जैसे साइबर हमले या रोज़मर्रा की सेवाओं में रुकावट डालना। कुछ विशेषज्ञों को यहाँ यही पैटर्न दिख रहा है।

एविएशन सुरक्षा समूह Diami के प्रमुख एरिक शाउटन ने कहा कि प्रभावित ज़्यादातर देश रूस के ख़िलाफ़ युद्ध में यूक्रेन का समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक़ यूरोप को हमेशा ऐसे परिदृश्य पर विचार करना चाहिए जिसमें कोई देश कई मोर्चों पर हमला करे, रेलवे से लेकर सुपरमार्केट तक और हाल में ब्लड बैंकों तक।

आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ पीटर आर. नॉयमान ने कहा कि इन घटनाओं में समन्वित हाइब्रिड हमले की विशेषताएँ हैं। हालाँकि उन्होंने ज़ोर दिया कि रूस के शामिल होने का कोई सबूत नहीं है।

ये धमकियाँ ऐसे समय आईं जब साइबर हमलों ने कई यूरोपीय देशों में सुपरमार्केट के कूलिंग सिस्टम को निशाना बनाया और फ़्रांस में ब्लड बैंकों में रुकावट आई। एविएशन साइबर सुरक्षा कंपनी Cyviation के सीईओ एलिरान अलमोग ने कहा कि इन धमकियों का मक़सद कामकाज में बाधा डालना और यह देखना हो सकता है कि एयरलाइनें, हवाई अड्डे और राष्ट्रीय प्राधिकरण कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।

असली क़ीमत क्या है?

सस्ती फ़र्ज़ी धमकियाँ सुरक्षा संसाधनों को खपा सकती हैं और कुछ ही घंटों में एयरलाइनों और हवाई अड्डों को भारी नुक़सान पहुँचा सकती हैं। अलमोग ने चेताया कि ऐसी रुकावटों की आर्थिक क़ीमत होती है और इससे जनता का भरोसा कमज़ोर हो सकता है।

नॉयमान ने एक और जोखिम बताया: अगर सौ बार कुछ नहीं होता, तो 101वीं बार चौकसी ढीली पड़ जाती है। उनके अनुसार ख़तरा ठीक यहीं है।

आगे क्या?

इसी हफ़्ते की शुरुआत में ऐसी ही धमकियों ने लगभग 20 उड़ानों को निशाना बनाया था और लड़ाकू विमान बुलाए गए थे। यह संगठित अभियान है या असंबंधित झूठी धमकियों की कड़ी, यह अब भी साफ़ नहीं है।

यूरोपीय अधिकारियों के सामने दोहरी चुनौती है: पूरी तरह सतर्क रहना और साथ ही ऐसे अलार्म के कारण, जो झूठे निकलते हैं, परिवहन और ज़रूरी सेवाओं को ठप होने से बचाना।

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कहानी की टाइमलाइन

यूरोपीय उड़ानों को बम की धमकियाँ · 2 घटनाएँ

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  1. यूरोप की उड़ानों पर फिर फ़र्ज़ी बम धमकियाँ: क्या यह हाइब्रिड वॉर है?

इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।

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