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DRDO ने ओडिशा तट से प्रलय मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण किया

22 दिसंबर 2022 को भारत के रक्षा अनुसंधान संगठन DRDO ने ओडिशा से अपनी प्रलय मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण किया।

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यह सार AI ने संदर्भ पूरा करने के लिए लिखा है; यह किसी ताज़ा स्रोत पर आधारित नहीं है।

22 दिसंबर 2022 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), यानी भारत की सरकारी सैन्य अनुसंधान एजेंसी, ने प्रलय मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण किया। यह प्रक्षेपण बंगाल की खाड़ी में ओडिशा तट के पास स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से हुआ।

प्रलय सतह से सतह पर मार करने वाली ठोस ईंधन की मिसाइल है। इसे अर्ध-बैलिस्टिक बताया जाता है, यानी यह उड़ान के दौरान अपना मार्ग बदल सकती है और तय चाप पर नहीं चलती, जिससे उसे रोकना कठिन होता है। इसे लगभग 150 से 500 किलोमीटर की मारक दूरी और पारंपरिक वारहेड ले जाने के लिए बनाया गया है। इसके विकास में भारत के पहले के पृथ्वी मिसाइल कार्यक्रम की तकनीक का उपयोग हुआ।

भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार परीक्षण अपने उद्देश्यों में सफल रहा और तट पर लगे रडार व ट्रैकिंग प्रणालियों ने उड़ान की निगरानी की। यह भारतीय सशस्त्र बलों के लिए सामरिक मिसाइल तैनात करने की दिशा में शुरुआती कदम था। इसके बाद आगे भी परीक्षण हुए। यह परीक्षण इसलिए अहम था कि इसने स्वदेशी प्रणालियों से भारत की पारंपरिक मिसाइल क्षमता बढ़ने का संकेत दिया।

कहानी की टाइमलाइन

DRDO की प्रलय मिसाइल के परीक्षण · 3 घटनाएँ

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  1. DRDO ने ओडिशा तट से प्रलय मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण किया

इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।

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