क्या TikTok ने फ्रांस के प्रदर्शनों में हिंसा भड़काई? 10 लाख वीडियो का अध्ययन
शोधकर्ताओं ने फ्रांस के युवा और महंगाई विरोधी प्रदर्शनों पर लगभग दस लाख TikTok वीडियो खंगाले। हिंसा के समन्वय में ऐप के इस्तेमाल के संकेत बहुत कम मिले।

क्या सोशल मीडिया ने फ्रांस के हालिया प्रदर्शनों के आसपास हुई हिंसा को हवा दी? सरकार कहती है, हाँ। लेकिन एक नया अध्ययन बताता है कि TikTok की भूमिका दावों से कहीं छोटी थी।
सरकार ने क्या कहा?
27 अक्टूबर को गृह मंत्री लोरां नुनेज़ ने कहा कि 17 अक्टूबर को लूटपाट करने वालों ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को «आगाह किया और रास्ता दिखाया»। सरकार ने कुछ समय के लिए कुछ प्लेटफ़ॉर्म तक पहुँच रोकने पर भी विचार किया।
इसके बाद गृह मंत्रालय ने विद्रोह की अपील करने वाली सामग्री को चिह्नित करने के लिए एक इकाई बनाई। प्रधानमंत्री सेबास्तियाँ लेकोर्न्यू ने प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों को बुलाया और कहा कि हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट के लिए उकसाने वाली अवैध सामग्री को बेहतर ढंग से रोकें। न्याय मंत्री जेरार दार्मानैं ने अभियोजकों से कहा कि दोषियों के लिए अतिरिक्त सज़ाएँ माँगें, जिनमें सोशल मीडिया पर प्रतिबंध भी शामिल है।
शोधकर्ताओं को क्या मिला?
यह अध्ययन फ्रांस के आर्थिक शोध केंद्र Cepremap का है और 3 नवंबर को प्रकाशित हुआ। कम्प्यूटेशनल सोशल साइंस और राजनीतिक समाजशास्त्र के विशेषज्ञ इसके तीनों लेखकों ने 1 सितंबर से 29 अक्टूबर तक के लगभग दस लाख सार्वजनिक वीडियो देखे। इन्हें कुल मिलाकर 16 अरब व्यूज़ और 45 लाख कमेंट मिले थे।
वे पुष्टि करते हैं कि लामबंदी की अपीलें खूब फैलीं। 17 अक्टूबर की तारीख़ 8–10 सितंबर तक ही चर्चा में आ गई थी, यानी पहले अख़बारी लेखों से पहले। वीडियो की संख्या 1 अक्टूबर (स्कूलों के प्रदर्शन) और 17 अक्टूबर (व्यापक युवा आंदोलन) को चरम पर रही।
लेकिन «समन्वित हिंसा के निशान बहुत सीमित हैं»। छात्र आंदोलन की शुरुआत में जिन स्कूलों की घेराबंदी हुई, उनमें से सिर्फ़ 8% का नाम घेराबंदी की तस्वीरें आने से पहले किसी वीडियो में आया था। हिंसक फ़ुटेज को 14% व्यूज़ मिले, और उनमें से आधे से ज़्यादा समाचार माध्यमों से आए। माँगों (32%) और हास्य (31%) वाले वीडियो को ज़्यादा व्यूज़ मिले।
कमेंट में हिंसा दिखाने वाले वीडियो की निंदा सराहना से लगभग दस गुना ज़्यादा हुई। हिंसा की सीधी अपीलें 0.27% कमेंट में थीं। टीम को बड़े पैमाने पर कृत्रिम प्रचार के भी संकेत नहीं मिले, चाहे वह विदेशी दखल हो या AI।
सीमाएँ क्या हैं?
लेखक ज़ोर देते हैं कि वे निजी मैसेजिंग ऐप या दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर समन्वय की संभावना खारिज नहीं कर सकते। फिर भी उनका कहना है कि आँकड़े इस दावे का समर्थन नहीं करते कि TikTok का इस्तेमाल हिंसक कृत्यों के समन्वय के लिए हुआ। वे यह भी सवाल उठाते हैं कि क्या सोशल मीडिया पर पाबंदी से हिंसा रुकती भी।
आगे क्या?
यह अध्ययन ऐसे समय आया है जब प्लेटफ़ॉर्म पर पाबंदी की बहस जारी है। यह 17 अक्टूबर के प्रदर्शनों और 5 नवंबर के विशाल मार्च के बाद आया है, जिसमें यूनियनों के मुताबिक़ 16 लाख और गृह मंत्रालय के मुताबिक़ 5,75,000 लोग शामिल हुए।
कहानी की टाइमलाइन
फ्रांस में महंगाई के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन · 5 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।



